Add To collaction

बने स्वयं प्रेरक

"प्रेरक"  का अर्थ होता है प्रेरित करने वाला अगर आप कोई भी कार्य कर रहे हैं उसमें आपका उत्साहवर्धन करने वाला आपका प्रेरक होता है।


प्रोत्साहन सिर्फ एक शब्द नहीं है। प्रोत्साहन एक ऐसा अस्त्र है जिससे बड़ी-बड़ी लड़ाइयों पर विजय प्राप्त की जा सकती है ।पुराण काल में जब भी राजा लड़ाई के लिए जाते थे तो उनके सैनिकों को प्रोत्साहित किया जाता था अलग अलग तरीके से उत्साहित किए जाते थे जिससे वह सैनिक लड़ सके और विजय प्राप्त कर सकें।

अगर कोई मनुष्य कुछ भी कार्य करता है और लोग उसे प्रोत्साहित करते हैं उसका उत्साह वर्धन करते हैं तो वह आगे भी उस कार्य को बहुत अच्छे से कर पाता है।

प्रोत्साहन के माध्यम से हम किसी भी व्यक्ति से कुछ भी कार्य करवा सकते हैं। उदाहरणतः हम जानते हैं कि विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए समय-समय पर वार्षिक कार्यक्रम या सह पाठयक्रम गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, जिसमें विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग कमरों कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जाता है जैसे संगीत, नृत्य, लेखन या खेल इत्यादि का आयोजन ।इन सभी कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाता है जिससे वह प्रोत्साहित होते हैं और उनके अंदर और आगे बढ़ने की ललक होती है। उसी तरह कुछ विद्यार्थियों को सहानुभूति पुरस्कार दिए जाते हैं यह तरीका भी उन को प्रोत्साहित करने का ही होता है ताकि वह आगे अच्छे परिणाम दे सकें।

कई व्यवसायिक संगठन भी अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक प्रणाली में ध्येय प्राप्ति के लिए "प्रोत्साहन संरचना" का उपयोग करते हैं।


प्रोत्साहन शब्द का जुड़ाव या उत्पत्ति "अभिप्रेरण" शब्द के साथ हुई।

अभिप्रेरण का अर्थ होता है किसी भी व्यक्ति को उर्जान्वित करना।


 अभिप्रेरण दो प्रकार का होता है :

१. आंतरिक

२. ब्राह्य 


"आंतरिक अभिप्रेरणा" मनुष्य के आत्मविश्वास को प्रेरित करता है।

" ब्राह्य अभिप्रेरण " में व्यक्ति सामाजिक और नैतिक प्रेरित होता है।


अभिप्रेरणा के चार स्रोत होते हैं:

१. आवश्यकता

२. प्रेरक

३. अग्रसरता

४. कौशल

बने स्वयं प्रेरक

प्रत्येक व्यक्ति के अनुभवों की प्रेरणा दूसरे को प्रभावित करती है। प्रेरक - व्यवहार विश्वास व प्रयासों का मिश्रण है ।मनुष्य को विजय प्राप्ति के लिए स्वयं का प्रेरक होना अति आवश्यक है आप कुछ भी कार्य करते हैं सबसे पहले स्वयं को बोलिए कि" मैंने प्रयास किया अच्छा किया और मैं आगे भी अच्छा करूंगा सफलता या असफलता बाद की बात है।"

दर्पण के सामने खड़े होकर अपनी सराहना  करिए क्योंकि जब आप खुद को सम्मान देंगे , खुद को आत्मविश्वासइत करेंगे तभी लोग और समाज आपको सम्मान व प्रोत्साहन देंगे।

कभी भी अपने आत्मविश्वास को गिरने ना दें , कभी भी यह ना सोचें कि" लोग मेरे काम पर ध्यान नहीं दे रहे हैं कोई मुझे प्रेरित नहीं कर रहा है।"

आप अपने प्रेरक खुद बनकर अपने कार्यों में लगे रहिए। समाज के लिए अच्छा कार्य करते रहिए क्योंकि यह समाज का एक कटु सत्य है कि कोई भी किसी को आगे बढ़ता देख पसंद नहीं करता है ,परंतु जब आप अपने कार्यों को निर्भीकता व तत्परता से करते रहेंगे तो एक दिन वही समाज आपका उत्साहवर्धन करेगा ।  जो मनुष्य आपको  प्रोत्साहित कर रहे हैं उनको सम्मान दें और जो आपको उत्साहित नहीं कर रहे हैं उनसे भी किसी भी तरह का कोई द्वेष ना रखें बल्कि यह सोचा कि शायद आपके कार्य में अभी कुछ ऐसी कमी बाकी है जो उन लोगों को पसंद नहीं आ रही है या आपको अपने अंदर अभी और विचार , मनन करने की आवश्यकता है जिससे वह लोग भी आपको पसंद करें। सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ीए।


सोचिए जब सब आपके हैं मंजिल आपकी है प्रतिभा आपकी है तो आप किसी और से अपनी जय की उम्मीद क्यों रखते हैं? 

यह आप की प्रतिभा है इसे आपको ही निकालना पड़ेगा।


प्रोत्साहन एक चमत्कार है जो निर्जीवता में भी सजीवता का संचरण करवा सकता है।


आग्रह पूर्वक उठिए स्वयं को प्रेरित करिए। अपनी प्रतिभा को निखारये । यह विश्वास मानिए कि यह  दुनिया आपके अभिप्रेरणा का  उदाहरण देगी। अपने मापदंडों को बदलिए ।



                                  "दूसरों की जय से पहले 

                                     खुद की जय करें"।


   9
8 Comments

kapil sharma

24-Jan-2021 11:57 AM

ummed hai es lekh se mai bhe kuch sekhunga 😊

Reply

Er. Nishant Saxena

30-Jan-2021 03:55 PM

Thanx Kapil ji.....

Reply

Author sid

22-Jan-2021 08:03 PM

👍👍👍

Reply

Er. Nishant Saxena

30-Jan-2021 03:55 PM

Thnx

Reply

Natash

22-Jan-2021 07:09 PM

👍👍👍

Reply

Er. Nishant Saxena

30-Jan-2021 03:55 PM

Thnx

Reply